Saturday, 11 April 2015

नीरा राडिया के टेप से कुल तीन पत्रकारों के चेहरे से नकाब उतर गया बरखा दत्त, प्रभु चावला और वीर संघवी ..!! - By Aditi Gupta


नीरा राडिया के टेप से कुल तीन पत्रकारों के चेहरे से नकाब उतर गया बरखा दत्त, प्रभु चावला और वीर संघवी ..!!
लेकिन मीडिया जगत इनको सजा देने के बजाय पूरी शिद्दत से इन दलालों के साथ खड़े रहे अगर किसी नेता की कोई सीडी सामने आती है तो ये नीच चैनल सारा दिन भौक भौक कर उसे इस्तीफा देने पर मजबूर कर देते है .. लेकिन जब पत्रकारों की सीडी सामने आती है और बकायदा फोरेंसिक जाँच मे सच पाई जाती है और उसी सीडी के आधार पर नीरा राडिया पर करवाई होती है ए. राजा और कनिमोझी जेल जाते है लेकिन बरखा दत्त सहित दूसरे पत्रकार मजे से ऐश करते है और बरखा दत्त के टेप के सामने आने से पूरा मीडिया जगत ‪#‎Presstitues‬ कॆ रूप में बदनाम हो गया और फिर एनडीटीवी के चैयरमैन प्रणव रॉय के द्वारा बरखा दत्त को निकालने के बजाय प्रोमोशन दिये जाने से पूरा मीडिया जगत और भी ज्यादा बदनाम हो गया और अब तो बरखा दत्त ने एनडीटीवी छोड़ कर खुद का मीडिया हाऊस व चैनल खोलने की तैयारियाँ कर ली है ... कैसे..??
आपको पता है NDTV की घपलेबाज पत्रकार बरखा दत्त पर क्या आरोप रहे है ? 

कारगिल मे एक मेजर के मना करने पर भी इसने कारगिल की रिपोर्टिंग दिखाई वो लाइव टेलिकास्ट पाकिस्तान मे भी देखा जा रहा था फिर पाकिस्तान ने इस जगह को ट्रेप किया और वहाँ मौजूद तीन भारतीय सैनिको को मार दिया
एडमिरल सुरेश मेहता ने बरखा दत्त को कारगिल युद्ध के दौरान तीन जवानों की हत्या का दोषी माना था,,,सेना का कहना था कि तीन फौजियों के मौत की दोषी है यह बरखा दत्त लेकिन बरखा दत ने फिर कांग्रेस की चाटुकारिता करके अपने आपको बचा लिया फलस्वरूप बरखा को पद्मश्री मिला फौजियो की हत्या केरने और पाकिस्तान की सहायता करने के लिए .....???
मीडिया द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करना भी बेमानी है, इसको सुधार करके सिर्फ "मीडिया की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता" ही कर देना चाहिये। कारगिल में मीडिया के कवरेज की बात हो या मुम्बई में, अगर ऐसा हुआ है तो वाकई में शर्मनाक है और टीआरपी का भूखा ही ऐसा कर सकता है। मीडिया को ये सब बेशक कवरेज करना चाहिये लेकिन उसे इतनी समझ होनी चाहिये कि किस से किस तरह के सवाल पूछने हैं और अगर मामला लाईव कवरेज और उसकी सेंसटिविटी से जुड़ा हो तो इस तरह के सवाल जवाब को दिखाना तो शायद विरोधियों (जैसे आतंकवादी) की मदद करना ही होगा।
बरखा दत्त के कई चेहरे हैं मै जब भी बरखा दत्त के बारे में सोचती हूँ मेरी आँखों के सामने 26/11 की बरखा नामक सनसनी फैलाती मीडियाई चुडैल घूमने लगती हैं है लाइव कवरेज में मीडियाई चुडैल बरखा एक बेहद फटेहाल व्यक्ति से पूछती हैं कहाँ है तुम्हारी पत्नी मार दी गयी तो क्या बंधक नहीं बना रखा है उसे ?

जी नहीं वो वहां छुपी है उस जगह,दूसरा दृश्य लगभग 4 घंटे के आपरेशन के बाद जैसे ही सेना का एक जनरल बाहर निकल कर आता है और खबर देता है कि और कोई बंधक ओबेराय में नहीं है बरखा कि ओर से एक और ब्रेकिंग न्यूज फ्लैश होती है अभी भी ओबेराय में 100 से अधिक बंधक मौजूद है निस्संदेह हमेशा की तरह बरखा उस वक़्त भी अपनी चुडैली टीआरपी के खबरी वेश्या भाव बढा़ने के लिए सनसनी बेच रही होती हैं सच्ची‪#‎Presstitute‬ उस वक्त जल रहे ताज के बजाय बरखा के चेहरे पर पड़ रहा कैमरे का फ्लैश इस सच को पुख्ता करता है....और जब नीदरलैंड के एक अप्रवासी भारतीय चैतन्य कुंटे ने इस के दौरान अपने ब्लॉग बरखा की इस पत्रकारिता पर सवाल खड़े किये तो बरखा और एन डी टी वी इंडिया ने पहले तो चैतन्य से माफ़ी मांगने को कहा और फिर उसके खिलाफ मुक़दमे की कार्यवाही शुरू कर दी अंततः कुंटे को वो पोस्ट हटानी पड़ी कोलंबिया में पढ़ी लिखी और लाइम लाइट में रहने की की शौक़ीन बरखा को चैतन्य जैसे आम ब्लॉगर की आलोचना भला क्यूँकर स्वीकार होती अफ़सोस इस बात का रहा कि उस वक्त किसी भी वेबसाईट या ब्लॉग पर बरखा दत्त की इस कार्यवाही को लेकर एक शब्द भी नहीं छापा गया लेकिन हाँ, उस एक घटना से ये साबित हो गया कि उनके भीतर एक ऐसी दम्भी महिला पत्रकार बैठी हुई है जो खुद अभिव्यक्ति की स्वतंत्र मालूम के खिलाफ किसी भी हद तक जा सकती है बरखा के सम्बन्ध में एक किस्सा शायद बहुत लोगों को नहीं मालूम हो ,बरखा दत्त नाम से एक इन्टरनेट डोमेन नेम हैदराबाद की एक फर्म ने ले रखा था ,बरखा दत्त को जैसे ही इस बात का पता चला वो न्यायायल चली गयी और वहीं ये नजीर दी कि मेरा नाम हिंदुस्तान में बेहद मशहूर है अगर इस नाम से कोई वेबसाईट बनायीं जायेगी तो लोगों के दिमाग में मै ही आउंगी ,इसलिए ये डोमेन नेम निरस्त कर दिया जाए ,हालांकि बरखा ये मुकदमा हार गयी ये बात कुछ ऐसी थी कि देश में बरखा दत्त नाम का कोई दूसरा हो ही नहीं सकता ,अगर हुआ तो उस पर बरखा मुकदमा कर देंगी ..!!

दूसरे के ऊपर तो हर कोई थानेदारी करना चाहता है लेकिन अपने ऊपर की थानेदारी किसी को बर्दाश्त नही, क्या तुम क्या मैं अपवाद कोई नही। दूध का धुला कोई नही है, ना नेता, ना राजनीति और ना ही मीडिया, इनमें से हर कोई अपने अपने हिस्से के आकाश में चमकता हुआ सूरज जरुर देखना चाहता है।
नीरा राडिया व बरखा दत्त के बातचीत के टेपकांड में रिकार्ड पूरी बातचीत सुनिये कि तथाकथित पदमश्री बरखा दत्त पत्रकार है या प्रेस्टीच्यूट्स के भी बुरके में एक दलाल / ब्रोकर मात्र...??

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